06 October 2022 12:06 PM

जोग संजोग टाइम्स बीकानेर,
महाज्ञानी रावण ब्राह्मण पिता और राक्षस माता का पुत्र था। वाल्मीकि रामायण के अनुसार रावण पुलस्त्य मुनि का पोता, अर्थात उनके पुत्र विश्वश्रवा का पुत्र था। इंद्रजाल, सम्मोहन सहित अनेक तांत्रिक विद्याओ के ज्ञाता रावण को छः दर्शन और चारों वेदों का ज्ञान होने के कारण दशानन कहा जाता है। राक्षस कुल को मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से ही रावण ने भगवान राम के साथ युद्ध किया था। आज भी मनुष्य के अंदर की बुराई को खत्म करने के उद्देश्य से लगातार दशहरे के पर्व पर रावण के प्रतिकात्मक पुतले के दहन की परंपरा चली आ रही है। बीकानेर में दशहरे का मुख्य समारोह डॉक्टर करणी सिंह स्टेडियम में मनाया जाता है। बीकानेर दशहरा कमेटी द्वारा सचेतन झांकियां निकाली जाती है। जो शहर भर में घूमकर स्टेडियम पहुंचती है, जहां राम रावण युद्ध के पश्चात रावण के पुतले का दहन किया जाता है। शाही रावण के रूप में लगातार तीन पीढ़ियों से आहूजा परिवार रावण की भूमिका निभाता रहा है। सबसे पहले स्व. माधोदास आहूजा, उन के बाद उनके पुत्र श्री शिवाजी आहूजा और 15 वर्षों से शिवाजी आहूजा के दत्तक पुत्र किशन कुमार आहूजा इस परंपरा का निर्वहन करते आ रहे हैं।वरिष्ठ पत्रकार K कुमार आहूजा रावण के रोल में दशहरा पर्व में निकली झांकियां बीकानेर दशहरा कमेटी द्वारा विशेष आकर्षण में रहे लोगों ने खूब आनंद लिया
जोग संजोग टाइम्स बीकानेर,
महाज्ञानी रावण ब्राह्मण पिता और राक्षस माता का पुत्र था। वाल्मीकि रामायण के अनुसार रावण पुलस्त्य मुनि का पोता, अर्थात उनके पुत्र विश्वश्रवा का पुत्र था। इंद्रजाल, सम्मोहन सहित अनेक तांत्रिक विद्याओ के ज्ञाता रावण को छः दर्शन और चारों वेदों का ज्ञान होने के कारण दशानन कहा जाता है। राक्षस कुल को मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से ही रावण ने भगवान राम के साथ युद्ध किया था। आज भी मनुष्य के अंदर की बुराई को खत्म करने के उद्देश्य से लगातार दशहरे के पर्व पर रावण के प्रतिकात्मक पुतले के दहन की परंपरा चली आ रही है। बीकानेर में दशहरे का मुख्य समारोह डॉक्टर करणी सिंह स्टेडियम में मनाया जाता है। बीकानेर दशहरा कमेटी द्वारा सचेतन झांकियां निकाली जाती है। जो शहर भर में घूमकर स्टेडियम पहुंचती है, जहां राम रावण युद्ध के पश्चात रावण के पुतले का दहन किया जाता है। शाही रावण के रूप में लगातार तीन पीढ़ियों से आहूजा परिवार रावण की भूमिका निभाता रहा है। सबसे पहले स्व. माधोदास आहूजा, उन के बाद उनके पुत्र श्री शिवाजी आहूजा और 15 वर्षों से शिवाजी आहूजा के दत्तक पुत्र किशन कुमार आहूजा इस परंपरा का निर्वहन करते आ रहे हैं।वरिष्ठ पत्रकार K कुमार आहूजा रावण के रोल में दशहरा पर्व में निकली झांकियां बीकानेर दशहरा कमेटी द्वारा विशेष आकर्षण में रहे लोगों ने खूब आनंद लिया
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