20 April 2022 11:50 AM
जोग संजोग टाइम्स,
भारत में पेटोल और डीजल के वाहन वर्ष 2030 तक ही चलेंगे ? सरकार की ऐसी ही योजना है, जिस पर काम चल रहा है। अब पेट्रो पदार्थों की कीमतें बढ़ने से न केवल अमेरिकी प्रायद्वीप और यूरोप के देश बल्कि प्रदूषण से जूझ रहे भारत जैसे विकासशील देशों ने भी इस दिशा में बड़ा कदम उठाया है. भारत ने भी 2030 तक नए पेट्रोल और डीजल गाड़ियों की बिक्री रोकने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए तेजी से देश में इलेक्ट्रिक कारों और हाइड्रोजन कारों की लॉन्चिंग का सिलसिला शुरू हो गया है. न केवल कंपनियों की बड़ी तैयारी इस दिशा में है बल्कि सरकारें भी दफ्तरों के लिए गाड़ियों की खरीदारी में पेट्रोल-डीजल गाड़ियों की जगह इलेक्ट्रिक गाड़ियों की खरीद को बढ़ाकर इस काम में तेजी लाने की ओर बढ़ रही हैं. इसके अलावा देश के तमाम शहरों में मेट्रो ट्रेन, बुलेट ट्रेन, हाइपरलूप ट्रेन, मोनो रेल, स्काई बसें जैसी नई ट्रांसपोर्ट सुविधाओं की शुरुआत की तैयारी भी जारी है जिससे लोगों को पेट्रोल-डीजल मुक्त ट्रांसपोर्ट की सुविधा मिल सके। इलेक्ट्रिक वाहनों पर भी छूट दी जाएगी।
वर्तमान में ये है हालात
इंडिया में अभी केवल शुरुआत भर है। वर्तमान में कुल कार बाजार में सिर्फ 1 फीसदी इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी है. लेकिन साल 2025 तक इसके 15 फीसदी यानी 475 अरब रुपये तक पहुंच जाने का अनुमान है। इस सपने को पूरा करने के रास्ते में अच्छी सड़कें, बिजली की ज्यादा खपत और चार्जिंग स्टेशंस, दूरदराज के इलाकों में भी चार्जिंग सुविधाएं जैसी जरूरतों को पूरा करना अनिवार्य शर्तें होंगी. इसके अलावा इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन कारों की भारी कीमतें भी पेट्रोल-डीजल मुक्त देश के रास्ते में बाधा बनेंगी जिनसे पार पाने की चुनौती न केवल भारत बल्कि दुनिया के बाकी शहरों के सामने भी होगी। इसके बाद भी अब चलेगी तो केवल इलेक्ट्रिक बाइक ही।
जोग संजोग टाइम्स,
भारत में पेटोल और डीजल के वाहन वर्ष 2030 तक ही चलेंगे ? सरकार की ऐसी ही योजना है, जिस पर काम चल रहा है। अब पेट्रो पदार्थों की कीमतें बढ़ने से न केवल अमेरिकी प्रायद्वीप और यूरोप के देश बल्कि प्रदूषण से जूझ रहे भारत जैसे विकासशील देशों ने भी इस दिशा में बड़ा कदम उठाया है. भारत ने भी 2030 तक नए पेट्रोल और डीजल गाड़ियों की बिक्री रोकने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए तेजी से देश में इलेक्ट्रिक कारों और हाइड्रोजन कारों की लॉन्चिंग का सिलसिला शुरू हो गया है. न केवल कंपनियों की बड़ी तैयारी इस दिशा में है बल्कि सरकारें भी दफ्तरों के लिए गाड़ियों की खरीदारी में पेट्रोल-डीजल गाड़ियों की जगह इलेक्ट्रिक गाड़ियों की खरीद को बढ़ाकर इस काम में तेजी लाने की ओर बढ़ रही हैं. इसके अलावा देश के तमाम शहरों में मेट्रो ट्रेन, बुलेट ट्रेन, हाइपरलूप ट्रेन, मोनो रेल, स्काई बसें जैसी नई ट्रांसपोर्ट सुविधाओं की शुरुआत की तैयारी भी जारी है जिससे लोगों को पेट्रोल-डीजल मुक्त ट्रांसपोर्ट की सुविधा मिल सके। इलेक्ट्रिक वाहनों पर भी छूट दी जाएगी।
वर्तमान में ये है हालात
इंडिया में अभी केवल शुरुआत भर है। वर्तमान में कुल कार बाजार में सिर्फ 1 फीसदी इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी है. लेकिन साल 2025 तक इसके 15 फीसदी यानी 475 अरब रुपये तक पहुंच जाने का अनुमान है। इस सपने को पूरा करने के रास्ते में अच्छी सड़कें, बिजली की ज्यादा खपत और चार्जिंग स्टेशंस, दूरदराज के इलाकों में भी चार्जिंग सुविधाएं जैसी जरूरतों को पूरा करना अनिवार्य शर्तें होंगी. इसके अलावा इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन कारों की भारी कीमतें भी पेट्रोल-डीजल मुक्त देश के रास्ते में बाधा बनेंगी जिनसे पार पाने की चुनौती न केवल भारत बल्कि दुनिया के बाकी शहरों के सामने भी होगी। इसके बाद भी अब चलेगी तो केवल इलेक्ट्रिक बाइक ही।
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29 September 2022 05:22 PM
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