06 October 2022 07:55 PM

आदर्श विद्या मंदिर उच्च प्राथमिक विद्यालय किसमीदेसर भीनासर में आज मातृ सम्मेलन आयोजित किया गया जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में महापौर सुशीला कंवर राजपुरोहित व महामंडलेश्वर महंत सरजूदास जी महाराज उपस्थित हुए। मुख्य अतिथि महापौर सुशीला कंवर राठौड़ ने कहा कि बालक बालिकाओं के विकास में मां का महत्वपूर्ण योगदान रहता है बालकों में अच्छे संस्कारों का निर्माण करना मां का कर्तव्य है।
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विद्यालय के व्यवस्थापक मेघराज जी टाक ने बताया कि मां ही बालक की प्रथम गुरु होती है और उन्होंने बच्चों में मोबाइल के प्रति आकर्षण से होने वाले दुष्परिणामों पर विचार रखें तथा माताओं को अपने बच्चों को मोबाइल से दूर रखने हेतु निवेदन किया।महामंडलेश्वर महंत सरजू दास जी महाराज ने भी माताओं को आशीर्वचन प्रदान किया कार्यक्रम में उपस्थित भाजपा महिला मोर्चा अध्यक्ष सुमन छाजेड़ ने भी अपने विचार रखें, कार्यक्रम में मंच का संचालन अमिता शर्मा ने किया। विद्यालय के प्रधानाचार्य अनुसूया रामावत ने सबका परिचय करवाया व बताया कि बालक भगवान का स्वरूप है उसे जो सिखाया जाता है वह वही जीवन में अपनाता है साथ ही इस कार्यक्रम के अंतर्गत प्रांत से आयोजित प्रतिभा प्रोत्साहन उत्कृष्ट परिणाम लाने वाले बालक बालिकाओं को पुरस्कृत किया गया इस कार्यक्रम में लगभग 300 मातृशक्ति उपस्थित रही।
आदर्श विद्या मंदिर उच्च प्राथमिक विद्यालय किसमीदेसर भीनासर में आज मातृ सम्मेलन आयोजित किया गया जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में महापौर सुशीला कंवर राजपुरोहित व महामंडलेश्वर महंत सरजूदास जी महाराज उपस्थित हुए। मुख्य अतिथि महापौर सुशीला कंवर राठौड़ ने कहा कि बालक बालिकाओं के विकास में मां का महत्वपूर्ण योगदान रहता है बालकों में अच्छे संस्कारों का निर्माण करना मां का कर्तव्य है।

विद्यालय के व्यवस्थापक मेघराज जी टाक ने बताया कि मां ही बालक की प्रथम गुरु होती है और उन्होंने बच्चों में मोबाइल के प्रति आकर्षण से होने वाले दुष्परिणामों पर विचार रखें तथा माताओं को अपने बच्चों को मोबाइल से दूर रखने हेतु निवेदन किया।महामंडलेश्वर महंत सरजू दास जी महाराज ने भी माताओं को आशीर्वचन प्रदान किया कार्यक्रम में उपस्थित भाजपा महिला मोर्चा अध्यक्ष सुमन छाजेड़ ने भी अपने विचार रखें, कार्यक्रम में मंच का संचालन अमिता शर्मा ने किया। विद्यालय के प्रधानाचार्य अनुसूया रामावत ने सबका परिचय करवाया व बताया कि बालक भगवान का स्वरूप है उसे जो सिखाया जाता है वह वही जीवन में अपनाता है साथ ही इस कार्यक्रम के अंतर्गत प्रांत से आयोजित प्रतिभा प्रोत्साहन उत्कृष्ट परिणाम लाने वाले बालक बालिकाओं को पुरस्कृत किया गया इस कार्यक्रम में लगभग 300 मातृशक्ति उपस्थित रही।
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