30 May 2024 07:05 PM

बीकानेर। हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर गुरुवार को ‘पत्रकारिता की दिशा और दशा’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित हुई। बीकानेर प्रेस क्लब के द्वारा आयोजित कार्यक्रम में जनसंपर्क विभाग के सहायक निदेशक हरिशंकर आचार्य ने कहा कि युवा पत्रकारों के लिए पत्रकारिता के मूल्यों को बनाए रखना आज सबसे बड़ी चुनौती है। इसके मद्देनजर युवा पत्रकारों के लिए पत्रकारिता मूल्यों पर आधारित प्रशिक्षण और कार्यशालाएं आयोजित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत ने पत्रकारिता के कई उतार चढ़ाव देखे,लेकिन आज भी लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में प्रेस को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है।बीकानेर प्रेस क्लब के अध्यक्ष भवानी जोशी ने कहा कि तीस मई 1826 को उदंत मार्तंड के प्रकाशन से हिंदी पत्रकारिता का सफर शुरू हुआ। देश की आजादी में पत्रकारिता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मिशनरी पत्रकारिता के उन आदर्शों का अनुसरण करना आज की मुख्य आवश्यकता है।प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष जय नारायण बिस्सा ने बीकानेर की पत्रकारिता पर अपनी बात रखते हुए कहा कि शंभू दयाल सक्सेना, अंबालाल माथुर, जे बगरहट्टा और पुरुषोत्तम केवलिया जैसे पत्रकारों ने पत्रकारिता जगत में बीकानेर को विशेष पहचान दिलाई। आगे भी इसी परंपरा के पत्रकार हुए। बिस्सा ने कहा कि पत्रकार बनना चुनौतीपूर्ण है। आज पत्रकारिता में शोध की आवश्यकता है, हालांकि रोजगार के साथ चुनौतियां कम नहीं हैं। एक अच्छे पत्रकार को टीआरपी से ज्यादा देश,दुनिया की चिंता करनी चाहिए। वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद आचार्य ने वेब और सोशल मीडिया के प्रादुर्भाव के बाद पत्रकारिता में आए बदलाव की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आज समाचारों में सूचना और शिक्षा की कमी महसूस की जा सकती है।पूर्व महासचिव विक्रम जागरवाल ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की कवरेज के दौरान राखी जाने वाली सावधानियों के बारे में बताया। जागरवाल ने कहा कि पत्रकार को अपनी नैतिक जिम्मेदारी का ईमानदारी से पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज पत्रकारिता के दौर में बदलाव आया है। हिन्दी के साथ अंग्रेजी का प्रयोग भी चिंतनीय है। जार के अध्यक्ष श्याम मारू ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए हिंदी पत्रकारिता के इतिहास की जानकारी दी। साथ ही भारत के दृष्टिकोण से हिंदी पत्रकारिता की उपयोगिता और आवश्यकता के बारे में बताया।इस दौरान कोषाध्यक्ष सुमित व्यास,मोहम्मद अली पठान,धीरज जोशी,कमलकांत शर्मा,रमेश बिस्सा,नौशाद अली,पीडी व्यास,राकेश आचार्य,अलंकार गोस्वामी, दिनेश जोशी और रमजान मुगल मौजूद रहे।
बीकानेर। हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर गुरुवार को ‘पत्रकारिता की दिशा और दशा’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित हुई। बीकानेर प्रेस क्लब के द्वारा आयोजित कार्यक्रम में जनसंपर्क विभाग के सहायक निदेशक हरिशंकर आचार्य ने कहा कि युवा पत्रकारों के लिए पत्रकारिता के मूल्यों को बनाए रखना आज सबसे बड़ी चुनौती है। इसके मद्देनजर युवा पत्रकारों के लिए पत्रकारिता मूल्यों पर आधारित प्रशिक्षण और कार्यशालाएं आयोजित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत ने पत्रकारिता के कई उतार चढ़ाव देखे,लेकिन आज भी लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में प्रेस को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है।बीकानेर प्रेस क्लब के अध्यक्ष भवानी जोशी ने कहा कि तीस मई 1826 को उदंत मार्तंड के प्रकाशन से हिंदी पत्रकारिता का सफर शुरू हुआ। देश की आजादी में पत्रकारिता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मिशनरी पत्रकारिता के उन आदर्शों का अनुसरण करना आज की मुख्य आवश्यकता है।प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष जय नारायण बिस्सा ने बीकानेर की पत्रकारिता पर अपनी बात रखते हुए कहा कि शंभू दयाल सक्सेना, अंबालाल माथुर, जे बगरहट्टा और पुरुषोत्तम केवलिया जैसे पत्रकारों ने पत्रकारिता जगत में बीकानेर को विशेष पहचान दिलाई। आगे भी इसी परंपरा के पत्रकार हुए। बिस्सा ने कहा कि पत्रकार बनना चुनौतीपूर्ण है। आज पत्रकारिता में शोध की आवश्यकता है, हालांकि रोजगार के साथ चुनौतियां कम नहीं हैं। एक अच्छे पत्रकार को टीआरपी से ज्यादा देश,दुनिया की चिंता करनी चाहिए। वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद आचार्य ने वेब और सोशल मीडिया के प्रादुर्भाव के बाद पत्रकारिता में आए बदलाव की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आज समाचारों में सूचना और शिक्षा की कमी महसूस की जा सकती है।पूर्व महासचिव विक्रम जागरवाल ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की कवरेज के दौरान राखी जाने वाली सावधानियों के बारे में बताया। जागरवाल ने कहा कि पत्रकार को अपनी नैतिक जिम्मेदारी का ईमानदारी से पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज पत्रकारिता के दौर में बदलाव आया है। हिन्दी के साथ अंग्रेजी का प्रयोग भी चिंतनीय है। जार के अध्यक्ष श्याम मारू ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए हिंदी पत्रकारिता के इतिहास की जानकारी दी। साथ ही भारत के दृष्टिकोण से हिंदी पत्रकारिता की उपयोगिता और आवश्यकता के बारे में बताया।इस दौरान कोषाध्यक्ष सुमित व्यास,मोहम्मद अली पठान,धीरज जोशी,कमलकांत शर्मा,रमेश बिस्सा,नौशाद अली,पीडी व्यास,राकेश आचार्य,अलंकार गोस्वामी, दिनेश जोशी और रमजान मुगल मौजूद रहे।
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