09 June 2021 11:36 AM

जोधपुर । पश्चिमी राजस्थान में एक बार
टिड्डी हमले का खतरा मंडरा रहा है। ईरान में पाकिस्तान
से सटे बॉर्डर के पास टिड्डी के कुछ समूह पनप रहे हैं।
इनके इसी महीने के अंत तक पाकिस्तान में घुसने की
आशंका बताई जा रही है। इसके बाद ये भारत में आ
सकते हैं। पिछले लगातार दो सालों से हो रहे टिड्डी
हमले में पश्चिमी राजस्थान में फसलों को भारी नुकसान
हो रहा है। संयुक्त राष्ट्र संघ के खाद्य एवं कृषि संगठन की
ओर से जारी चेतावनी में कहा गया है कि इथोपिया और
सोमालिया में इन दिनों हो रही बारिश के चलते बड़ी
संख्या में टिड्डियों को पनपने का मौका मिला है। हालांकि
अंडों से बाहर निकलते ही इन्हें खत्म करने का अभियान
चलाया जा रहा है।
वहीं दक्षिण-पश्चिमी ईरान में अनुकूल मौसम के
बीच बड़ी संख्या में टिड्डियों ने अंडे दे रखे हैं। इनमें से
हॉपर बाहर निकलना शुरू हो गए हैं। इन्हें मारने के लिए
ईरान में भी विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
कृषि संगठन का मानना है कि जून के अंत और
जुलाई की शुरुआत में पश्चिमी राजस्थान में भी मानसून
सक्रिय हो जाएगा। ऐसे में इन्हें पर्याप्त नमी मिलती रहेगी।
संगठन ने कहा है कि हालांकि इस बार टिड्डियों की संख्या
पिछले साल के मुकाबले काफी कम रहने का अनुमान
है। भारत में टिड्डी दल पाकिस्तान से होकर बाड़मेर-
जैसलमेर में प्रवेश करता है। पिछले दो सालों में लाखों
की संख्या में आए टिड्डी समूहों ने फसलों को भारी
नुकसान पहुंचाया था।
जोधपुर । पश्चिमी राजस्थान में एक बार
टिड्डी हमले का खतरा मंडरा रहा है। ईरान में पाकिस्तान
से सटे बॉर्डर के पास टिड्डी के कुछ समूह पनप रहे हैं।
इनके इसी महीने के अंत तक पाकिस्तान में घुसने की
आशंका बताई जा रही है। इसके बाद ये भारत में आ
सकते हैं। पिछले लगातार दो सालों से हो रहे टिड्डी
हमले में पश्चिमी राजस्थान में फसलों को भारी नुकसान
हो रहा है। संयुक्त राष्ट्र संघ के खाद्य एवं कृषि संगठन की
ओर से जारी चेतावनी में कहा गया है कि इथोपिया और
सोमालिया में इन दिनों हो रही बारिश के चलते बड़ी
संख्या में टिड्डियों को पनपने का मौका मिला है। हालांकि
अंडों से बाहर निकलते ही इन्हें खत्म करने का अभियान
चलाया जा रहा है।
वहीं दक्षिण-पश्चिमी ईरान में अनुकूल मौसम के
बीच बड़ी संख्या में टिड्डियों ने अंडे दे रखे हैं। इनमें से
हॉपर बाहर निकलना शुरू हो गए हैं। इन्हें मारने के लिए
ईरान में भी विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
कृषि संगठन का मानना है कि जून के अंत और
जुलाई की शुरुआत में पश्चिमी राजस्थान में भी मानसून
सक्रिय हो जाएगा। ऐसे में इन्हें पर्याप्त नमी मिलती रहेगी।
संगठन ने कहा है कि हालांकि इस बार टिड्डियों की संख्या
पिछले साल के मुकाबले काफी कम रहने का अनुमान
है। भारत में टिड्डी दल पाकिस्तान से होकर बाड़मेर-
जैसलमेर में प्रवेश करता है। पिछले दो सालों में लाखों
की संख्या में आए टिड्डी समूहों ने फसलों को भारी
नुकसान पहुंचाया था।
RELATED ARTICLES
17 September 2023 04:26 PM
© Copyright 2021-2025, All Rights Reserved by Jogsanjog Times| Designed by amoadvisor.com